About
Dr. Ramnarayan Shukla was one of the finest writer in Hindi Language, he also rooted the stage plays in the oldest city on the earth, Kashi at the birth anniversary of Munshi Premchand. From the year 1974 to 2003, he taught in BHU.

Ex-Professor, Writer, & Philosopher.
At the age of 80, he left the world. He took birth in Sonebhadra district of Uttar Pradesh, India. His Father, Sri Aditya Prasad Shukla was a Spritual Religious Narrator, he wanted his son to be "Sanskrit" scholar and "Karmkaand Pandit".
- Birthday: 07 June 1941
- Birthplace: Sonebhadra, Uttar Pradesh, India
- Website: www.ramnarayanshukla.com
- Death: 21 April 2021
- Father: Late Sri Aditya Prasad Shukla
- Degree: PhD
After completing middle studies, he came to the Sanskrit school located in Robertsganj to do 'Madhyama'.
Coming to Robertsganj was important from the 'territorial spread' point of view of him.
Sanskrit shlokas were becoming memorized, perseverance intensified.
In the midst of all this, going to marriage ceremonies and having classical discussions
had become a hobby then. In later days, relatives and pattidars used to call him just because he would
have some intellectual discussion. Then there was a great trend of such intellectual discussions in Sonbhadra.
It was a pleasure for the father that his son's name was spreading rapidly.
The fascination for classical music also took place and led him to practice 'Bhairav Raga',
he became famous in the region as 'Bhairav Pandit'.
Life Events
As an individual identity, Ramnarayan's life is full of goals and achievements, from a meritorious student to an artist he emerged himself with learning from books & every best possible sources. In the memory of great story writer "Munshi Premchand", Ramnarayan started stage plays in Lamahi, birthplace of Premchand with the event naming "Lamahi Chalo".
Sumary
Dr. Ramnarayan Shukla
Aiming healthy soceity and expansion of Hindi Language, Ramnarayan life is full of inspiration.
- Professor, BHU (1974-2003)
- Hindi Writer (Articles, Book, Poetry)
- Stage Play Initiater in Kashi
- Seminars
- Social Service
Education
PhD - Doctor of Philosophy in Hindi Literature
1971
Banaras Hindu University (BHU)
Masters in Hindi Literature
1966
Banaras Hindu University (BHU)
"धर्म और गीता" (Dharma aur Geeta)
Banaras Hindu University (BHU)
Passed from first posititon
Bachelors in Hindi Literature
1964
Banaras Hindu University (BHU)
Intermediate
1962
DAV, Varanasi
पूर्व मध्यमा (Purv Madhyma)
1960
वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय: (Varanasey Sanskrit Vishwavidyalay)
Work & Extra Curricular
Teaching
1970 - 2003
Banaras Hindu University, Varanasi
- 70 Students approximately completed their PhD in Direction or Co-Direction.
- Organised various stage plays.
- 26 Years experience.
- Directed more than 20 researchs.
- Attended many seminars.
Writting
1970 - 2018
Hindi Literature
- Written 7 Books
- 46 essays & articles.
Stage Plays
1970 - 2018
- Initiated "Lamahi Chalo" to strengthen stage shows in Kashi, in the memory of Munshi Premchand.
- Contributed in more than 17 plays.
Volleyball
1960
वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय: (Varanasey Sanskrit Vishwavidyalay)
- First Position
Music
1961
वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय: (Varanasey Sanskrit Vishwavidyalay)
Poetry of Dr. Ramnarayan Shukla
डॉक्टर रामनारायण शुक्ल द्वारा रचित "सोचता हूँ : कभी - कभी"
इस कविता को आत्मसात् करने के लिए एक अद्भुत प्रयास करते हुए, डॉक्टर रामनारायण शुक्ल जी के सुपुत्र श्री संजय शुक्ल जी ने उनकी रचित कविता को अपने स्वरों जे सजाते हुए प्रस्तुत किया। डॉक्टर शनिश ज्ञवाली जी ने बांसुरी के माध्यम से इस कविता के मर्म को पहुँचाने का कार्य किया। कैमरा एवं निर्देशन श्री हरि दर्शन सांख्य और एडिटिंग मुकेश तिवारी जी का रहा। -
Book on him by Dr. Shashank Shukla

रामनारायण शुक्ल - शब्द और कर्म के प्रतिबद्ध साधक
"मिडिल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राबर्ट्सगंज स्थित संस्कृत स्कूल में 'मध्यम' करने आ गए।
रॉबर्ट्सगंज आना उनके लिए 'प्रादेशिक प्रसार' की दृष्टि से महत्वपूर्ण था।
संस्कृत के श्लोक कंठस्थ हो रहे थे, लगन तेज हो गई थी।
इन सबके बीच शादी समारोहों में जाना और शास्त्रीय चर्चाएं करना
तब शौक बन गया था बाद के दिनों में रिश्तेदार और पाटीदार उन्हें सिर्फ इसलिए बुलाते थे क्योंकि वह चाहते थे
कुछ बौद्धिक चर्चा करें। तब सोनभद्र में इस तरह की बौद्धिक चर्चाओं का जबरदस्त चलन था।
पिता के लिए यह खुशी की बात थी कि उनके बेटे का नाम तेजी से फैल रहा था।
शास्त्रीय संगीत के प्रति आकर्षण भी पैदा हुआ और उन्होंने 'भैरव राग' का अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया,
वे क्षेत्र में 'भैरव पंडित' के नाम से प्रसिद्ध हुए।"
रामनारायण शुक्ल जी के व्यक्तित्व और जीवन पर लिखी यह किताब उनके वैचारिक समृद्धि को दर्शाती है, डा शशांक शुक्ला ने बखूबी उनके जीवन को समझ कर
लोगों के सामने उनके व्यक्तित्व को प्रस्तुत किया है।
Work
An individual identity doesn't depend only on the personality but do also include the work done by the person and the knowledge he have. Ramnarayan Shukla achieved many praises with his knowledge and work towards the hindi literature. His knowledge and efforts were not only limited to papers but also shared via art.
People Say
डॉक्टर कैलाश नारायण तिवारी - प्रोफ़ेसर, हिंदी विभाग, दिल्ली यूनिवर्सिटी
केवल हमलोगो के लिए या हमारे लिए आचार्य रामनारायण शुक्ल जी गुरू ही नहीं थे बल्कि गुरू के साथ साथ पथपदर्शक और सुख दुःख के साथी भी थे, शुरू शुरू में तो मैं गुरू जी के इतने क़रीब नहीं आ पाया था, पर जैसे जैसे मैं रीसर्च सायंटिस्ट (पूरा सुनने के लिए विडीओ देखे)-
Media Coverage




Media Coverages Links -
- प्रोफेसर रामनारायण शुक्ल : एक जन-बुद्धिजीवी, समकालीन जनमत द्वारा ऑनलाइन पत्रिका में डॉक्टर रामनारायण शुक्ल जी के व्यक्तित्व पर छपा लेख।
- रामनारायण शुक्ल: एक अध्यापक का सांस्कृतिक प्रयाण, नाट्य कला के सदुपयोग और डॉक्टर रामनारायण शुक्ल के प्रयासों को चित्रित करता हुआ यह लेख लोकमंच पत्रिका के ऑनलाइन पोर्टल पर प्रकाशित हुआ।
- प्रेमचंद जी के जन्मशती वर्ष 1980 में डॉ राम नारायण शुक्ल द्वारा लमही में वृहद् कार्यक्रम किया गया था, "लमही चलो" के जन्मदाता के रूप में डॉक्टर रामनारायण शुक्ल जी के समर्पित भाव को दर्शाता यह लेख इडीयोफ़ पर प्रकाशित हुआ।
- दैनिक जागरण के ऐप्लिकेशन में डॉक्टर रामनारायण शुक्ल जी के स्वर्गवासी होने पर छपा शोक संदेश
Books Links -