ram narayan shukla

Book on him by Dr. Shashank Shukla

रामनारायण शुक्ल - शब्द और कर्म के प्रतिबद्ध साधक

"मिडिल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राबर्ट्सगंज स्थित संस्कृत स्कूल में 'मध्यम' करने आ गए। रॉबर्ट्सगंज आना उनके लिए 'प्रादेशिक प्रसार' की दृष्टि से महत्वपूर्ण था।

संस्कृत के श्लोक कंठस्थ हो रहे थे, लगन तेज हो गई थी। इन सबके बीच शादी समारोहों में जाना और शास्त्रीय चर्चाएं करना तब शौक बन गया था।
बाद के दिनों में रिश्तेदार और पाटीदार उन्हें सिर्फ इसलिए बुलाते थे क्योंकि वह चाहते थे कुछ बौद्धिक चर्चा करें। तब सोनभद्र में इस तरह की बौद्धिक चर्चाओं का जबरदस्त चलन था।

पिता के लिए यह खुशी की बात थी कि उनके बेटे का नाम तेजी से फैल रहा था। शास्त्रीय संगीत के प्रति आकर्षण भी पैदा हुआ और उन्होंने 'भैरव राग' का अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया, वे क्षेत्र में 'भैरव पंडित' के नाम से प्रसिद्ध हुए।"

रामनारायण शुक्ल जी के व्यक्तित्व और जीवन पर लिखी यह किताब उनके वैचारिक समृद्धि को दर्शाती है, डा शशांक शुक्ला ने बखूबी उनके जीवन को समझ कर लोगों के सामने उनके व्यक्तित्व को प्रस्तुत किया है।

Dr. Shashank Shukla
Associate Professor, Hindi Department, Jammu Central University

रामनारायण शुक्ल - शब्द और कर्म के प्रतिबद्ध साधक
पार्ट - 2