ram narayan shukla

Seminars - संगोष्ठी

रामनारायण शुक्ल हमेशा से ही विचारों के धनी रहे, लोगों के बीच में उनकी विश्वसनीयता उनकी इसी विशेषता के वजह से अत्यधिक थी। इसी कारण से उन्हें कई संगोष्ठियो में भी आमंत्रित किया गया।

जिन विभागीय एवं राष्ट्रीय गोष्ठियों में डॉक्टर रामनारायण शुक्ल जी ने संयोजक, संचालक अथवा वक्ता के रूप में भाग लिया -

  1. विश्व हिंदी सम्मेलन - नई दिल्ली, 1983 - 84

  2. प्रेमचंद संगोष्ठी - हिंदी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय 1982

  3. रामचंद्र शुक्ल शताब्दी समारोह - मार्च 1985, हिंदी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

  4. भारतेंदु पुण्य तिथि समारोह - जनवरी, 1986

  5. मैथिली शरण गुप्ता जन्मशती समारोह - हिंदी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, 1988

  6. प्रसाद संगोष्ठी - फ़रवरी, 1989

  7. माखन लाल चतुर्वेदी संगोष्ठी - हिंदी विभाग, मार्च 1990

  8. राहुल संगोष्ठी - हिंदी विभाग, मार्च 1995

  9. हज़ारी प्रसाद द्विवेदी संगोष्ठी - हिंदी विभाग, अप्रैल, 1986

  10. पाठ्यक्रम विकास केंद्र यू जी सी दिल्ली की बैठकों में हिस्सेदारी
    • अक्तूबर 1986, तिरुपति, आंध्र प्रदेश
    • सितम्बर 1986, वाराणसी
    • दिसम्बर 1986
    • मार्च 1987
    • मई 1987
    • अक्टूबर 1987, दिल्ली
    • अक्टूबर 1987 - जनवरी 1988, दिल्ली

  11. प्रेमचंद मेला - लमही, वाराणसी का आयोजन, 10 जून 1980

  12. लघु नाट्य समारोह संगोष्ठी - गोरखपुर, 1989

  13. जन साहित्य सांस्कृतिक समाख्या - आंध्र प्रदेश, जनवरी 1989

  14. 21 दिवसीय नाट्य कार्यशाला - मई से जून 1982, नगर छात्रसंघ, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजन

  15. भक्तिकालीन साहित्य की राष्ट्रीय प्रासंगिकता - राष्ट्रीय संगोष्ठी आचार्य साहिला शोध संस्थान 6-7 सि० 1994 का संयोजन

  16. भारतीय नवजागरण और आधुनिक साहित्य - राष्ट्रीय संगोष्ठी आचार्य शोध संस्थान, 6-7 सितम्बर 1994 संयोजन

  17. नाटककार प्रसाद : नाट्य विभाग और नाट्य भाषा शीर्षक निभंध का पाठ - भव्य संगोष्ठी, सरदार वल्लभ विद्यापीठ, गुजरात, 1980

  18. छायावदोत्तर कविता पर संभाषण - सरदार वल्लभ विद्यापीठ, गुजरात, हिंदी पुनर्निर्वन पाठ्य चर्चा अक्टूबर 1990

  19. महाप्रस्थान और कवि नरेश मेहता - सरदार वल्लभ विद्यापीठ, गुजरात, हिंदी पुनर्निर्वन पाठ्य चर्चा अक्टूबर 1990

  20. आधुनिक हिंदी कविता पर संभाषण - हिंदी पुनर्निर्वन पाठ्य चर्चा, वर्धमान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल, नवम्बर 1990

  21. समकालीन कविता पर संभाषण - हिंदी पुनर्निर्वन पाठ्य चर्चा, वर्धमान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल, नवम्बर 1990

  22. आलोचक रामचंद्र शुक्ल और हिंदी आलोचना पर संभाषण - हिंदी पुनर्निर्वन पाठ्य चर्चा, नवम्बर 1990

  23. संश्थोध्ररी हिंदी कविता और धूमिल - 1990

  24. हिंदी प्रेमकाटरा और कनुप्रिया (भाषण) - हिंदी पुनर्निर्वन पाठ्य चर्चा, वर्धमान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल, नवम्बर 1990

  25. इनके अतिरिक्त स्थानीय संगोष्ठियो में अनगिनत बार हिस्सेदारी

Work

An individual identity doesn't depend only on the personality but do also include the work done by the person and the knowledge he have. Ramnarayan Shukla achieved many praises with his knowledge and work towards the hindi literature. His knowledge and efforts were not only limited to papers but also shared via art.